
#रिपोर्ट- नीरज कुमार त्रिपाठी।
दिल्ली। भारतीय भाषा अभियान सर्वोच्च न्यायालय इकाई , दिल्ली ने महाकवि सुब्रमण्य भारती की जयंती के उपलक्ष्य में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम महाकवि के विचारों आदर्शों और उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित था। बता दें कि संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने उनके जीवन विचारों और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी का संचालन स्वयंप्रभा ने कुशलतापूर्वक किया। उन्होंने महाकवि के दृष्टांतों को प्रस्तुत किया। स्मृति कुमारी ने उनके सम्पूर्ण जीवन परिचय को विस्तारपूर्वक साझा किया। रामजी पांडेय ने महाकवि के भारतीयता और सांस्कृत मूल्यों के दर्शन को व्याख्यायित किया। रजनीश ने अनेकता में एकता की भावना को स्वर प्रदान किया। रोहित ने उनके योगदानों को तार्किक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए उनकी उपलब्धियों को रेखांकित किया। विनय ने महाकवि की अल्पायु में ही अर्जित विशिष्ट उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में रजनीश झा, बजरंग लाल, राजेंद्र यादव, पुनीत श्योराण, गोपाल शरण पाठक, सुजीत कुमार सहित अनेकों अधिवक्ताओं ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। इस संगोष्ठी ने महाकवि सुब्रमण्य भारती के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन राघवेंद्र शुक्ल के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कठिन परिस्थितियों में भी देश की एकता और संप्रभुता बनाए रखने के लिए सभी को सहयोग और सहभागिता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंत में वेंकट मणि त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने महाकवि के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए सभी के प्रयासों की सराहना की। अंत में सबने मिलकर महाकवि सुब्रमण्य भारती के आदर्शों का अनुसरण करने और भारतीय भाषाओं, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
