
रिपोर्ट- नीरज कुमार त्रिपाठी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से सीधे सुप्रीम कोर्ट परिसर को जोड़ने वाला फुटओवर ब्रिज इन दिनों नशेड़ियों और लापरवाही का शिकार हो गया है। यह पुल अब आम जनता की सुविधा के बजाय असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। नशे में धुत युवक यहां गंदे बिस्तर बिछा कर खुलेआम सोते देखे जाते हैं। जिससे न केवल सुप्रीम कोर्ट आने-जाने वाले लोगों को असुविधा होती है, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंता भी बढ़ गई है।
स्थानीय अधिवक्ता राघवेन्द्र शुक्ल ने इस गंभीर समस्या को उजागर करते हुए बताया कि फुटओवर ब्रिज पर नियमित सफाई न होने के कारण वहां कचरे का ढेर जमा रहता है। इसके साथ ही वहां लगी तीनों लिफ्टों के लिए नियुक्त किए गए पांच ऑपरेटरों का व्यवहार भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि ये ऑपरेटर आपात स्थिति में सहयोग करने के बजाय एक जगह इकट्ठा होकर आपस में बातचीत में व्यस्त रहते हैं।
इस लापरवाही के कारण न केवल सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों, वादकारियों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि यह स्थल धीरे-धीरे असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
राघवेन्द्र शुक्ल, जो सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और एससीबीए (Supreme Court Bar Association) के सदस्य भी हैं, ने रजिस्ट्रार प्रशासन (सुप्रीम कोर्ट), एनडीएमसी और सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से इस समस्या पर शीघ्र संज्ञान लेने और समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।
– N24 मीडिया

We support Shukla ji on this issue . Public places are becoming place of wrong activities . Like we have people staying under the bridge begging at red light and sometimes snatching things if window is open all over Delhi . Same like footbridge problem