
कुलदीप शुक्ला की रिपोर्ट
प्रयागराज। प्रयागराज विद्वत परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को महर्षि भारद्वाज आश्रम में ‘राम आए हैं’ उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन भगवान श्रीराम के प्रयागराज आगमन की तिथि—चैत्र शुक्ल द्वादशी—को स्मरण करते हुए किया गया।
बता दें कि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत यमला पुरी ने कहा कि यह तिथि हमारे इतिहास और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। “भगवान राम आज ही के दिन प्रयागराज आए थे, इसलिए इस पर्व को हम हर वर्ष उत्सवपूर्वक मनाएंगे। तीर्थों के पुनर्जागरण और सांस्कृतिक संरक्षण का यह प्रयास आने वाले समय में एक नई दिशा देगा।” इस अवसर पर न्यायमूर्ति सुधीर नारायण ने कहा, “प्रयागराज की आध्यात्मिक विरासत को संजोने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को उठानी होगी। राम हमारे जीवन के आदर्श हैं और महर्षि भारद्वाज के विचारों से प्रेरणा लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए।”
प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिन अजीत सिंह ने कहा कि यदि हम भगवान राम और महर्षि भारद्वाज जैसे ऋषियों की स्मृतियों और तिथियों को भूल जाएंगे, तो हम अपनी विरासत को खो देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोक सेवा आयोग अध्यक्ष प्रो. के.बी. पांडे ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी ने किया और संयोजक वीरेंद्र पाठक ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम और महर्षि भारद्वाज के संवाद का स्मरण किया गया। पुष्पांजलि अर्पण, आरती और दीपदान के माध्यम से आयोजन को पवित्रता और भक्ति से परिपूर्ण किया गया।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख अतिथियों में रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासी, शैलेंद्र अवस्थी, जुगनू किशोर तिवारी, पूर्व डीआईजी अभिषेक मिश्र, राहुल दुबे, डॉ. विनोद त्रिपाठी, जगत नारायण तिवारी, विक्रम मालवीय, शशिकांत मिश्र, अरुण शुक्ला, डॉ. रंजन बाजपेई, संदीप शर्मा, अशोक तिवारी, धर्मेंद्र तिवारी, अन्नू घिल्डियाल, सभासद आशीष द्विवेदी, अनामिका चौधरी, सुधीर द्विवेदी, कुलदीप शुक्ला, मुकुल मिश्र, विनय दुबे, सुधीर सिन्हा, भोला तिवारी, काली शंकर, डॉ. श्रवण कुमार मिश्र, विजय द्विवेदी, शास्त्री जी, उमा तिवारी, डॉ. अखिलेश मिश्र, डॉ. जगदीश्वर द्विवेदी, दिनेश तिवारी, सुधीर गुप्ता, राजेन्द्र पाण्डेय, कमलाकांत पाण्डेय, अनूप त्रिपाठी और मृत्युंजय तिवारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने प्रयागराज की सांस्कृतिक चेतना और रामायण कालीन विरासत को जीवंत कर दिया।
