न्याय और विधि शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न।।

रिपोर्ट- नीरज कुमार त्रिपाठी

भोपाल। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के आयाम भारतीय भाषा अभियान और पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य न्यायालयों और विधि शिक्षा में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में देशभर से चयनित 175 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

बता दें कि कार्यशाला का उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर) के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी और पीपुल्स ग्रुप के निदेशक मयंक विश्नोई की उपस्थिति में हुआ। भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता जयदीप राय ने बताया कि वर्तमान न्यायिक प्रणाली में भाषा एक बड़ी बाधा है, जिससे पक्षकारों को न्याय प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में न्याय प्रक्रिया को बढ़ावा देना समय की मांग है। कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषयों पर चार सत्र आयोजित किए गए। जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय भाषाएँ, सूचना का अधिकार, याचिका प्रक्रिया और भारतीय भाषा अभियान की यात्रा और भारतीय ज्ञान परंपरा में विधि की भूमिका। भारतीय संविधान और भारतीय भाषाएँ, जिसमें व्यवहार प्रक्रिया, भारतीय न्याय संहिता, नागरिक सुरक्षा संहिता, साक्ष्य अधिनियम, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और ऋण वसूली न्यायाधिकरण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यशाला में देशभर से आए अनेक विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया। वक्ताओं में राघवेन्द्र शुक्ल, रामजी पांडेय, धीरेन्द्र परमार (अतिरिक्त महाधिवक्ता, मध्यप्रदेश), कृष्ण कुमार शर्मा, मननंजय मिश्र, अजय मिश्र, प्रो. अनुराग दीप, प्रो. कृष्णकांत द्विवेदी और प्रो. वीकेश त्रिपाठी सहित अन्य विद्वान शामिल रहे। समापन सत्र में यह संकल्प लिया गया कि न्यायिक प्रक्रिया में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु जनजागृति अभियान चलाया जाएगा और भविष्य की कार्य योजनाएं बनाई जाएंगी। यह आयोजन भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा और न्यायिक सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया।

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