
रिपोर्ट- नीरज कुमार त्रिपाठी
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2025 – न्यायालयों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अधिवक्ताओं के संगठन भारतीय भाषा अभियान ने अपने प्रयास तेज़ कर दिए हैं। जनता को उसकी अपनी भाषा में न्याय दिलाने और विधि शिक्षा को मातृभाषा में सुलभ बनाने के उद्देश्य से यह संगठन देशभर में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इसी क्रम में भारतीय भाषा अभियान – दिल्ली प्रांत द्वारा रोहिणी न्यायालय में हाल ही में आयोजित कार्यशाला की समीक्षा बैठक मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के एस-ब्लॉक परामर्श कक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में दिल्ली की सभी इकाइयों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया और कार्यशाला के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान मासिक कार्यकारिणी बैठक, अध्ययन मंडल संगोष्ठी को और अधिक प्रभावशाली बनाने के उपायों पर मंथन किया गया। साथ ही, आगामी हिन्दी पखवाड़ा को सभी इकाइयों में समर्पित रूप से आयोजित करने की रणनीति पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
भारतीय भाषा अभियान का मानना है कि न्यायिक प्रणाली में भारतीय भाषाओं की भागीदारी केवल भाषा का प्रश्न नहीं, बल्कि न्याय के लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी भी है। संगठन द्वारा चलाए जा रहे जनजागरण अभियान को विधि क्षेत्र से जुड़े लोग भी सकारात्मक रूप से ले रहे हैं।
इस समीक्षा बैठक ने न्याय और भाषा के समन्वय को लेकर चल रही इस राष्ट्रव्यापी मुहिम को नई दिशा देने का कार्य किया है। यह जानकारी सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता राघवेन्द्र शुक्ल ने दी।
