वर्षों बाद खुली हवा में सांस लेने जैसी अनुभूति : न्यायमूर्ति संदीप मेहता

रिपोर्ट- नीरज कुमार त्रिपाठी

दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि “वर्षों बाद खुली हवा में सांस लेने जैसी अनुभूति हो रही है। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य जनता के लिए है, इसलिए निर्णय भी जनता की भाषा में होने चाहिए।” वे भारतीय भाषा अभियान द्वारा 14 से 28 सितंबर तक आयोजित हिंदी पखवाड़ा 2025 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) सभागार में भारतीय विधिज्ञ परिषद, युको बैंक और भारतीय भाषा अभियान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

बता दें कि न्यायमूर्ति मेहता ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए प्रारंभिक डेढ़ वर्षों तक केवल हिंदी आसुलिपिक उपलब्ध होने के कारण निर्णय हिंदी में ही लिखाए जाते थे। उन्होंने कहा, “हिंदी में लिखे गए निर्णय अधिक स्पष्ट और जनसामान्य के लिए समझने योग्य होते थे। किसी भाषा का विरोध नहीं होना चाहिए, परंतु अपनी भाषा अपनी ही होती है, उसकी बराबरी अन्य भाषा नहीं कर सकती।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आईआईटी जोधपुर में हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यमों में बी.टेक शिक्षा होना गौरव की बात है और हर भारतीय को अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए।

इस अवसर पर भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने जनता को उनकी भाषा में न्याय दिलाने और विधि शिक्षा में भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने परिषद द्वारा भारतीय भाषा समिति के गठन की जानकारी भी दी।भारत सरकार की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने न्यायपालिका और अन्य क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं के उपयोग को और बढ़ाने पर बल दिया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव व भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संरक्षक अतुल कोठारी ने देशभर में चलाए जा रहे अभियान और जनजागरण कार्यों का उल्लेख किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित युको बैंक के महाप्रबंधक राजीव तिवारी ने बैंकिंग क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के प्रयोग से ग्राहकों को बेहतर सेवा व लक्ष्य प्राप्ति के उदाहरण प्रस्तुत किए।समारोह में अधिवक्ता जयदीप राय (राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय भाषा अभियान) ने विषय प्रस्तावना रखते हुए संगठन की आवश्यकता, लक्ष्य और कार्यों का विवरण दिया तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में 22 अनुसूचित भाषाओं में कामकाज की संभावनाओं का उल्लेख किया। वहीं, अधिवक्ता राघवेन्द्र शुक्ल (प्रांत संयोजक, दिल्ली प्रांत) ने हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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